ज्यादातर यूटीआई आंतों के बैक्टीरिया के मूत्रमार्ग से मूत्राशय तक पहुंचने से होते हैं। ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा एनएचएस के मुताबिक महिलाओं में मूत्रमार्ग छोटा होता है, इसलिए उन्हें यह संक्रमण ज्यादा होता है। एनएचएस कम पानी पीने और मूत्राशय पूरी

स्वास्थ्य डेस्क, नई दिल्ली। ठंड का मौसम शुरू होते ही अक्सर लोगों की पानी पीने की आदत बदल जाती है। प्यास कम लगने के कारण कई लोग दिनभर में मुश्किल से दो-तीन गिलास पानी पीते हैं। वहीं, ठंडे बाथरूम में बार-बार जाने से बचने के लिए पेशाब रोककर रखने की आदत भी बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कम पानी पीना और लंबे समय तक पेशाब रोकना मूत्र मार्ग संक्रमण यानी यूटीआई का जोखिम बढ़ा सकता है। यह समस्या उन महिलाओं के लिए अधिक चिंता का विषय है, जिन्हें पहले भी बार-बार संक्रमण हो चुका है।
यूटीआई के अधिकांश मामले आंतों में पाए जाने वाले जीवाणुओं के मूत्रमार्ग के रास्ते मूत्राशय तक पहुंचने से होते हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के अनुसार, महिलाओं में मूत्रमार्ग की लंबाई कम होने के कारण उन्हें पुरुषों की तुलना में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। कम पानी पीना और मूत्राशय का पूरी तरह खाली न होना भी संक्रमण के जोखिम से जुड़े कारक हैं। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब बनने और शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे मूत्र मार्ग में मौजूद जीवाणुओं को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
सर्दियों में यूटीआई के मामले वास्तव में बढ़ते हैं या नहीं, इस पर भी अध्ययन हुए हैं। अमेरिका के अस्पतालों के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामले गर्मियों में अधिक और सर्दियों में कम पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल ठंड का मौसम यूटीआई बढ़ने की वजह नहीं है। हालांकि, यदि सर्दियों में पानी का सेवन बहुत कम हो जाए और व्यक्ति घंटों पेशाब रोककर रखे, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
इससे बचने के लिए प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी लिया जा सकता है। अपने पास पानी की बोतल रखें और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का ध्यान रखें। पेशाब आने पर उसे देर तक रोकने के बजाय समय पर जाएं और मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने की कोशिश करें।
स्वच्छता का ध्यान रखना भी संक्रमण से बचाव में मददगार हो सकता है। शौचालय के इस्तेमाल के बाद सफाई हमेशा आगे से पीछे की ओर करनी चाहिए। सूती अंतर्वस्त्र पहनना और निजी अंगों को साफ तथा सूखा रखना बेहतर माना जाता है। बहुत तंग कपड़ों और नमी बनाए रखने वाले कपड़ों से बचें। सुगंधित साबुन या ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल भी न करें, जिनसे निजी अंगों में जलन हो सकती है। शारीरिक संबंध बनाने के बाद पेशाब करना भी यूटीआई से बचाव के लिए उपयोगी आदत मानी जाती है।
पेशाब करते समय जलन या दर्द होना, बार-बार और अचानक पेशाब की इच्छा होना, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, पेशाब का धुंधला दिखाई देना, उसमें खून आना और पेट के निचले हिस्से में दर्द होना यूटीआई के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
यदि तेज बुखार, कंपकंपी या कमर में पसलियों के नीचे दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण संक्रमण के गुर्दों तक पहुंचने का संकेत हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित लोगों और उन व्यक्तियों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, जिनके लक्षण 48 घंटे में ठीक नहीं होते। यदि छह महीने में दो बार या एक साल में तीन बार यूटीआई हो चुका है, तो इसे बार-बार होने वाला संक्रमण माना जाता है और इसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
सर्दियों में पर्याप्त पानी पीना, पेशाब न रोकना और साफ-सफाई का ध्यान रखना मूत्र मार्ग संक्रमण से बचाव में मददगार हो सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और उपचार कराना ही बेहतर उपाय है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

