
मथुरा,उत्तर प्रदेश। वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए अब आधार कार्ड के माध्यम से पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। दीपावली के बाद लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत सेवायतों के यजमान, शिष्य, अधिकारी और उनके परिजनों सहित उन लोगों का पंजीकरण किया जाएगा, जिन्हें मंदिर में वीआईपी दर्शन की सुविधा दी जानी है। शनिवार को उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
बैठक में तय किया गया कि वीआईपी दर्शन के इच्छुक लोगों की पहचान आधार कार्ड के आधार पर दर्ज की जाएगी। हालांकि, पंजीकरण दर्शन से एक दिन पहले कराना होगा या दर्शन वाले दिन भी इसकी सुविधा मिलेगी, इस संबंध में अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। समिति की ओर से पंजीकरण की विस्तृत प्रक्रिया दीपावली के बाद जारी की जाएगी।
मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर लंबे समय से सेवायतों और प्रबंधन समिति के बीच व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ था। शनिवार की बैठक में सेवायत सदस्यों ने श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंदिर में श्रद्धालु चार रेलिंग के माध्यम से दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं। इनमें से दो रेलिंग मंदिर के भीतर आगे तक जाती हैं, जबकि अन्य दो आधे प्रांगण से ही बाहर की ओर निकल जाती हैं। इसके कारण कुछ श्रद्धालुओं को ठाकुरजी को प्रसाद और माला अर्पित करने का अवसर नहीं मिल पाता।
इस समस्या पर समिति अध्यक्ष अशोक कुमार ने स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लेने और समाधान का प्रयास करने का भरोसा दिया। बैठक में दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाने और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
बैठक के दौरान मंदिर में प्राप्त दानराशि का विवरण भी साझा किया गया। समिति अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि पिछले ढाई माह में 28 दान पेटिकाएं खोली गई हैं, जिनसे कुल 5.37 करोड़ रुपये की दानराशि प्राप्त हुई है। अभी 4 दान पेटिकाएं खोली जानी बाकी हैं। उनके अनुसार, पूर्व में इसी अवधि में औसतन 4 से साढ़े 4 करोड़ रुपये तक चढ़ावा प्राप्त होता था। इस बार शेष दान पेटिकाएं खुलने के बाद कुल दानराशि 6 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है।
मंदिर प्रबंधन का यह निर्णय वीआईपी दर्शन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण और दर्शन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार है।

