नई दिल्ली,एजेंसी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की पश्चिमी रेंज-1 टीम ने नकली भारतीय मुद्रा के सिक्के बनाने और उनकी आपूर्ति करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में 20 रुपये के नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनका अंकित मूल्य करीब 1 लाख रुपये बताया गया है। मामले में खेप ले जा रहे आरोपी पारस जैन को मौके से गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में कथित मुख्य सप्लायर उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और उसके 2 सहयोगियों अनुराग पाल उर्फ लंकेश तथा जनार्दन कुमार चौरसिया उर्फ संतोष को भी गिरफ्तार किया गया। इस मामले में कुल 4 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।
पुलिस के अनुसार, 8 सितंबर 2026 को उपनिरीक्षक गुमान सिंह को सूचना मिली थी कि पारस जैन सफेद रंग की टोयोटा इटियोस कार से मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास नकली 20 रुपये के सिक्कों की खेप पहुंचाने आने वाला है। सूचना के आधार पर निरीक्षक आशीष शर्मा के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली। कार की पिछली सीट से एक काले रंग का लैपटॉप बैग और प्लास्टिक की बोरियों में रखे 50 पॉलीथिन पैकेट बरामद हुए। प्रत्येक पैकेट में 100 नकली सिक्के रखे थे। इस तरह कुल 5,000 सिक्के मिले, जिनका अंकित मूल्य करीब 1 लाख रुपये है।
मौके से पारस जैन पुत्र स्वर्गीय विजेंद्र जैन, निवासी निहाल विहार, दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सिक्कों के नमूने लेकर शेष खेप, बैग और सिक्कों के परिवहन में इस्तेमाल कार को जब्त कर लिया। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य के माध्यम से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 105 के तहत की गई। आरोपी के पास से एक आईफोन 12 मिनी मोबाइल फोन भी बरामद किया गया, जिसे पुलिस ने जांच के लिए जब्त किया है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में पारस जैन ने नकली सिक्कों की खेप उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह से प्राप्त करने की बात बताई। उसके अनुसार, 1 लाख रुपये अंकित मूल्य के सिक्के करीब 70,000 रुपये में उपलब्ध कराए जाते थे, जिन्हें आगे बेचने और बाजार में चलाने की योजना थी। आरोपी ने यह भी बताया कि उसे खेप 7 सितंबर 2026 को सौंपी गई थी।
जांच के दौरान पुलिस ने उपकार लूथरा के बारे में जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार, वह पहले भी इसी तरह के मामलों में संलिप्त रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि पारस जैन की गिरफ्तारी के बाद उपकार लूथरा अपने सहयोगियों के साथ कथित निर्माण इकाई को हरियाणा के सोनीपत से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान सहारनपुर पुलिस की एसओजी टीम ने उपकार लूथरा और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था।
दिल्ली पुलिस ने सहारनपुर जेल से आरोपियों को अदालत में पेश कराने के लिए प्रोडक्शन वारंट प्राप्त किए। उपकार लूथरा, अनुराग पाल, जनार्दन कुमार चौरसिया, कुलदीप और हिमांशु उर्फ गुल्लू को तीस हजारी अदालत में पेश किया गया। अदालत की अनुमति के बाद पांचों से पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक, जांच में उपकार लूथरा, अनुराग पाल और जनार्दन कुमार चौरसिया की इस नेटवर्क में भूमिका सामने आने पर उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। कुलदीप और हिमांशु की भूमिका के संबंध में प्रेस विज्ञप्ति में गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
पुलिस ने इस मामले में टोयोटा इटियोस कार, आईफोन 12 मिनी, लैपटॉप बैग और करीब 1 लाख रुपये अंकित मूल्य के नकली 20 रुपये के सिक्के बरामद किए हैं। दर्ज मामले के अनुसार, एफआईआर संख्या 214/2026 दिनांक 8 सितंबर 2026 को दिल्ली के क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, पारस जैन के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। वहीं, उपकार लूथरा के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा और बिहार में विभिन्न आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त अपराध शाखा हर्ष इंदोरा के निर्देश पर, सहायक पुलिस आयुक्त राज कुमार की निगरानी में की गई। टीम का नेतृत्व निरीक्षक आशीष शर्मा ने किया। पुलिस के मुताबिक, मामले की आगे की जांच जारी है और नकली सिक्कों के निर्माण, आपूर्ति तथा बाजार में प्रसार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

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