फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट के संयुक्त ‘बेस्ट चीफ मिनिस्टर सर्वे 2026’ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है।

लखनऊ,एजेंसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट के संयुक्त ‘बेस्ट चीफ मिनिस्टर सर्वे 2026’ में पहला स्थान हासिल किया है। सर्वे में जारी परिणामों के अनुसार, 1000 अंकों के पैमाने पर योगी आदित्यनाथ को 897 अंक मिले हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 881 अंकों के साथ दूसरे और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा 874 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आयोजकों के मुताबिक, यह सर्वे मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता, कार्यशैली, जनस्वीकार्यता और सुशासन सहित विभिन्न पहलुओं के मूल्यांकन के आधार पर तैयार किया गया। इसमें कुल 15 मुख्यमंत्रियों को शामिल किया गया था। इनमें पहले दस स्थान पर रहने वाले मुख्यमंत्रियों को ‘बेस्ट चीफ मिनिस्टर’ श्रेणी में रखा गया, जबकि 11वें से 15वें स्थान तक के मुख्यमंत्रियों को ‘मुख्यमंत्री पंचरत्न’ श्रेणी में शामिल किया गया।
सर्वे की प्रक्रिया करीब तीन से चार महीने तक चली और इसे तीन चरणों में पूरा किया गया। पहले चरण में सोशल मीडिया और पारंपरिक मीडिया में मुख्यमंत्रियों से जुड़ी खबरों, चर्चाओं और जनधारणाओं का विश्लेषण किया गया। दूसरे चरण में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों, बुद्धिजीवियों और विशेषज्ञों की राय शामिल की गई। तीसरे चरण में आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और विचार जाने गए। इन तीनों चरणों से प्राप्त जानकारियों का विश्लेषण करने के बाद निर्धारित मानकों के आधार पर अंतिम अंक तय किए गए।
आयोजकों ने मूल्यांकन के लिए सुशासन, कानून-व्यवस्था, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व और छवि, प्रशासनिक कार्यक्षमता, विभागों की समझ, लोकप्रियता, दूरदर्शिता तथा नीतियों के परिणाम जैसे पहलुओं को प्रमुखता दी। इनमें पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिकों की सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, सरकारी योजनाओं का प्रभाव और भविष्य की योजनाओं को भी शामिल किया गया।
सर्वे के नतीजों में योगी आदित्यनाथ को शीर्ष स्थान मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक कार्यशैली और उनके नेतृत्व की चर्चा तेज होने की संभावना है। हालांकि, यह रैंकिंग सर्वे के आयोजकों की ओर से निर्धारित प्रक्रिया और मानकों पर आधारित है। इसे सभी मुख्यमंत्रियों के प्रदर्शन का आधिकारिक सरकारी मूल्यांकन नहीं माना जाना चाहिए।

