अगर आप भी रोजाना टू-व्हीलर से सफर करते हैं और चेहरे पर सिर्फ एक रूमाल या कपड़े का साधारण मास्क बांधकर खुद को प्रदूषण से सुरक्षित मान लेते हैं, तो आपको थोड़ा सावधान होने की जरूरत है।

स्वास्थ्य डेस्क, नई दिल्ली। सुबह घर से दोपहिया वाहन लेकर निकलते समय चेहरे पर रूमाल बांधना या कपड़े का साधारण मास्क पहनना आम बात है। अधिकांश लोग इसे धूल और प्रदूषण से बचने का आसान उपाय मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म प्रदूषक कणों से फेफड़ों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर पाता। खासकर भारी यातायात वाले इलाकों में रोजाना सफर करने वालों के लिए यह लापरवाही स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
कपड़े का मास्क या रूमाल हवा में मौजूद धूल के बड़े कणों को कुछ हद तक रोक सकता है, लेकिन यह पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन कणों को प्रभावी ढंग से फिल्टर नहीं कर पाता। ये सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, रूमाल या सामान्य कपड़े का मास्क चेहरे पर पूरी तरह फिट नहीं होता। नाक और गालों के आसपास बने खाली स्थानों से प्रदूषित हवा अंदर प्रवेश कर सकती है। वाहन चलाते समय सांस लेने की गति बढ़ने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
वाहनों से निकलने वाले धुएं और अन्य प्रदूषण में केवल धूल के कण ही नहीं, बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी मौजूद हो सकती हैं। सामान्य कपड़े का मास्क इन गैसों से सुरक्षा प्रदान नहीं करता। इसलिए केवल चेहरे पर रूमाल बांध लेने को प्रदूषण से बचाव का पर्याप्त उपाय मानना सही नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक सफर करने वाले लोगों को सही आकार और फिटिंग वाला प्रमाणित एन95 या एन99 मास्क इस्तेमाल करना चाहिए। मास्क का चेहरे पर ठीक से फिट होना जरूरी है, ताकि किनारों से प्रदूषित हवा भीतर न जा सके। इसके साथ ही अच्छी गुणवत्ता वाला फुल-फेस हेलमेट पहनना और उपलब्ध व सुरक्षित होने पर उसका वाइजर बंद रखना भी धूल और हवा में उड़ते कणों के सीधे संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, हेलमेट और मास्क भी प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं देते।
दोपहिया वाहन से रोजाना सफर करने वालों को अपने स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए। यात्रा से लौटने के बाद बार-बार खांसी आना, सांस फूलना, छाती में भारीपन महसूस होना या सांस लेने में परेशानी होना ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये समस्याएं लगातार बनी रहती हैं, बार-बार होती हैं या बढ़ने लगती हैं, तो चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
प्रदूषण से बचाव के लिए केवल चेहरे पर कपड़ा बांधना पर्याप्त नहीं है। सही मास्क का इस्तेमाल, सुरक्षित हेलमेट, प्रदूषण के अत्यधिक स्तर वाले समय और मार्गों से यथासंभव बचाव तथा स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों के प्रति सतर्कता अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।

