नासा का 1.5 टन वजनी नील गेहरेल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी टेलीस्कोप ने 22 साल के अंतरिक्ष सफर के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया और इंडोनेशिया के सुमात्रा प्रांत के ऊपर जलकर नष्ट हो गया।

जकार्ता,एजेंसी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीनों में शामिल नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी बुधवार, 4 नवंबर को पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने के बाद इंडोनेशिया के ऊपर गिर गई। करीब डेढ़ टन वजनी इस अंतरिक्ष दूरबीन के धरती पर गिरने के साथ ही ब्रह्मांड में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोटों के अध्ययन का उसका 22 वर्षों से जारी मिशन समाप्त हो गया। इसके मलबे के मुंबई में गिरने की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन इंडोनेशिया के ऊपर इसके गिरने से भारत के लिए संभावित खतरा टल गया।
नासा के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सूर्य की बढ़ती गतिविधियों के कारण स्विफ्ट की कक्षा लगातार नीचे आ रही थी। उसे दोबारा ऊंची कक्षा में पहुंचाने के लिए एक निजी कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने पुष्टि की कि स्विफ्ट ने इंडोनेशिया के निकट पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश किया और वहीं गिर गया।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वायुमंडल में प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष दूरबीन का कितना हिस्सा जलकर नष्ट हुआ। नासा को आशंका है कि इसके कुछ घने और मजबूत टुकड़े वायुमंडल में पूरी तरह नष्ट होने से बच गए होंगे। अंतरिक्ष एजेंसी ने पहले इसके मलबे को समुद्र में गिराने की योजना बनाई थी। इसके बावजूद भारत, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में मलबा गिरने की आशंका जताई गई थी।
स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को वर्ष 2004 में अंतरिक्ष में स्थापित किया गया था। इसे मूल रूप से दो वर्षों तक गामा-रे विस्फोटों और तारों के विस्फोट जैसी घटनाओं का अध्ययन करने के उद्देश्य से भेजा गया था। हालांकि, इसने निर्धारित अवधि से करीब 11 गुना अधिक समय तक काम किया। अपने लंबे अभियान के दौरान इसने हजारों खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया और ब्रह्मांड में होने वाले गामा-रे विस्फोटों की पहचान कर अन्य दूरबीनों तक शुरुआती जानकारी पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण वेधशाला के रूप में काम किया।
स्विफ्ट के अभियान के समाप्त होने के बाद अब नासा एक अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष दूरबीन हबल स्पेस टेलीस्कोप को सुरक्षित रखने के विकल्प तलाश रहा है। वर्ष 1990 में प्रक्षेपित हबल की कक्षा भी सौर गतिविधियों के कारण धीरे-धीरे नीचे आ रही है। मौजूदा आकलन के अनुसार, यदि इसे बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया तो यह 2030 के दशक के मध्य तक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है।
नासा ने निजी कंपनियों से सुझाव मांगे हैं कि हबल की कक्षा को ऊंचा उठाने, उसके सिस्टम को उन्नत बनाने या उसे नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाने के लिए क्या तकनीकी विकल्प अपनाए जा सकते हैं। एजेंसी के अनुसार, इस दिशा में प्रस्तावित किसी भी मिशन को वर्ष 2032 तक पूरा करना होगा।
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने कहा है कि हबल से अभी भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कार्य किए जाने बाकी हैं। इसलिए उसे यथासंभव लंबे समय तक सक्रिय रखने के लिए हर उचित विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। वहीं, नासा की साइंस मिशन प्रमुख निकी फॉक्स के अनुसार, स्विफ्ट के मामले में समय कम होने के कारण जल्दबाजी में निर्णय लेने पड़े, लेकिन हबल को बचाने के संभावित उपायों पर विचार करने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी के पास अभी अधिक समय उपलब्ध है।

