अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद, डोनल्ड ट्रंप ने संसद से आने वाले बेतुके कानूनों को वीटो करने की बात कही है।

वाशिंगटन,एजेंसी। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स के नियंत्रण के बाद ट्रंप ने राष्ट्रपति की संवैधानिक वीटो शक्ति का इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘वीटो’ लिखी लाल रंग की ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (मैगा) टोपी की तस्वीर साझा करते हुए साफ किया कि कांग्रेस से पारित होने वाले विधेयकों को रोकने का अधिकार उनके पास है।

फॉक्स न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने सत्ता के नए समीकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति पहले भी कई बार आ चुकी है। उन्होंने कहा कि वीटो राष्ट्रपति के पास मौजूद सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। उनके मुताबिक, डेमोक्रेट्स संसद से ऐसे विधेयक पारित कराकर भेज सकते हैं, जिन्हें वह बेतुका मानते हैं और ऐसे प्रस्तावों पर वह वीटो का इस्तेमाल करेंगे।

मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप की घटती लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। दोनों सदनों में बहुमत मिलने से पार्टी को राष्ट्रपति प्रशासन की नीतियों, फैसलों और विधायी एजेंडे पर प्रभावी निगरानी रखने का अवसर मिलेगा। इससे ट्रंप के कार्यकाल के शेष दो वर्षों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज होने की संभावना है।

चुनावी नतीजों के बावजूद ट्रंप ने अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए। उन्होंने उम्मीदवारों की जीत और हार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वह खुद राजनीतिक विश्लेषक की भूमिका में नजर आएंगे और चुनाव परिणामों के अच्छे तथा बुरे पहलुओं पर अपनी राय रखेंगे। हालांकि, द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने चुनावी नतीजों को स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई। ट्रंप ने कहा कि वह परिणामों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और दोनों दल मिलकर आगे बढ़ने का रास्ता निकाल सकते हैं।

अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित विधेयक पर वीटो लगाने का अधिकार प्राप्त है। यह शक्ति राष्ट्रपति को किसी विधेयक को कानून बनने से रोकने का अवसर देती है। हालांकि, राष्ट्रपति का वीटो अंतिम नहीं होता। यदि प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से उसी विधेयक को दोबारा पारित कर दें, तो राष्ट्रपति का वीटो निष्प्रभावी हो जाता है और विधेयक उनके हस्ताक्षर के बिना भी कानून बन सकता है।

ट्रंप अपने पिछले राष्ट्रपति कार्यकाल में भी कई बार वीटो शक्ति का इस्तेमाल कर चुके हैं। रक्षा बजट, ईरान से संबंधित सैन्य शक्तियों के प्रस्ताव और सीमा पर आपातकाल से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने विधेयकों को रोकने के लिए इस संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया था। हालांकि, कुछ मामलों में कांग्रेस ने दो-तिहाई बहुमत के जरिए उनके वीटो को निष्प्रभावी भी किया था।

अब मध्यावधि चुनाव के बाद कांग्रेस में बदले राजनीतिक समीकरण के बीच ट्रंप की वीटो शक्ति और डेमोक्रेट्स के विधायी बहुमत की परीक्षा होगी। राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच सहमति बनती है या टकराव बढ़ता है, इसका असर आने वाले दो वर्षों में अमेरिकी शासन और नीतिगत फैसलों पर पड़ सकता है।

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