साल 2026 में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। इस वर्ष नरक चतुर्दशी और मुख्य दिवाली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी और 11 नवंबर को भाई दूज के साथ इस महापर्व का समापन होगा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाने के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है।

दीपावली का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला पर्व है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज के साथ इसका समापन होता है। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। वर्ष 2026 में इन त्योहारों की तिथियां और पूजा के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं।

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक और वृषभ काल शाम 6 बजकर 2 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है, जिसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 8 नवंबर, रविवार को पड़ेगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। इस दिन सुबह स्नान करने और घरों में दीप जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।

वर्ष 2026 में दीपावली भी 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली पर विधि-विधान से पूजा करने और दीप प्रज्वलित करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा वर्ष 2026 में 10 नवंबर, मंगलवार को होगी। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 50 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। इसी प्रसंग की स्मृति में गोवर्धन पूजा की जाती है।

पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दूज के पर्व के साथ होगा। वर्ष 2026 में भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे शुरू होकर 11 नवंबर को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट तक रहेगी। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा और साथ निभाने का संकल्प लेते हैं।

इस तरह वर्ष 2026 में दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी और 11 नवंबर को भाई दूज के साथ पांच दिवसीय पर्व का समापन होगा। त्योहारों की तैयारियों के बीच श्रद्धालु पूजा-पाठ और खरीदारी के लिए पंचांग में बताए गए शुभ समय का ध्यान रख सकते हैं।

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