
गाजियाबाद। दूर बैठे साइबर अपराधियों को पकड़ना और उन्हें सजा कराना चुनौतीपूर्ण काम है। जनपद के साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने 80 से ज्यादा अपराधियों को दबोचकर सलाखों के पीछे डाला है। साइबर अपराध से बचाव का सबसे सरल उपाय सावधानी और जागरूकता है। इसके जरिए अपराध को होने से रोका जा सकता है। जनपद में साइबर अपराध में ठगी की धनराशि रिकवरी करीब 30 प्रतिशत है। साइबर अपराध, क्राइम और ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभाल रहे अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी से मीडीया ने साइबर अपराधियों पर कार्रवाई और जागरूकता अभियान एवं यातायात को लेकर सवाल किए।
साइबर अपराध पर जागरूकता और सावधानी के जरिए प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। जब लोग जागरूक होंगे तो सावधान भी रहेेंगे। पुलिस के पास आने से पहले यही दोनों उपाय काम आते हैं। इसलिए जनता को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे। अपराध होने के बाद पुलिस का काम शुरू होता है।
साइबर अपराधियों को पकड़ना और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना हमारा काम है। इसके लिए लगातार पुलिसकर्मी काम कर रहे हैं। एक साल में ही लोगों के करीब 27 करोड़ रुपये वापस कराए गए हैं और 80 से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। साइबर अपराध में गंवाई जाने वाली धनराशि की रिकवरी को मौजूदा करीब 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत अगले कुछ माह में करने की तैयारी है।
आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए दो तरह से अभियान चलाएंगे। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे। स्कूल और कालेजों के साथ ही सोसायटियों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साइबर अपराध के प्रति बुजुर्गों और युवाओं के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
बुजुर्ग साइबर अपराधियों के लिए साफ्ट टारगेट हैं। उन्हें सेक्सटार्शन, बीमा फ्राड और डिजिटल अरेस्ट कर अपराधी धनराशि ट्रांसफर करा लेते हैं। इसलिए बुजुर्गों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएंगी। कालेज के युवाओं और महिलाओं के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

